नवरात्रि 2025: 28 सितंबर को माँ कालरात्रि

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नवरात्रि 2025: 28 सितंबर को माँ कालरात्रि की पूजा

 

परिचय — नवरात्रि और उसके महत्व

नवरात्रि  2025 (शरद नवरात्रि) हिन्दू धर्म में माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का महापर्व है। यह उत्सव अश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होकर नवमी/दशमी तक चलता है। 2025 में यह पर्व 22 सितंबर 2025 से शुरू होकर 2 अक्टूबर 2025 को विजयादशमी के साथ समाप्त होगा।

नवरात्रि 2025: 28 सितंबर को माँ कालरात्रि

 

नवरात्रि के प्रत्येक दिन एक अलग रूप की देवी की पूजा की जाती है, और प्रत्येक रूप की विशेषता, स्वरूप, उपासना विधि, मंत्र, भोग आदि अलग-अलग होते हैं।Gemini AI 2025 : फोटो को कैसे एडिटिंग करे

28 सितंबर 2025, सप्तमी तिथि की पड़ती है, और उस दिन माँ कालरात्रि की पूजा विशेष रूप से होती  है।

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माँ कालरात्रि — स्वरूप, विशेषताएँ और महत्व

नवरात्रि 2025 माँ कालरात्रि (Kalaratri) दुर्गा के नौ रूपों में से एक हैं, जिन्हें “रात्रि की आत्मा” या “जो अंधकार को हराती है” माना जाता है।

‘काला’ अर्थात् अंधकार, ‘रात्रि’ अर्थात् रात — इस नाम से ही यह स्पष्ट होता है कि यह देवी उन शक्तियों का विनाश करती हैं जो अज्ञान, भय, अँधेरे, पाप और दोषों को जन्म देती हैं।

उनकी छवि में वे भयभीत करतीं हैं, चेहरा शांत और कृपालु, चार हाथों वाली होती हैं — जिनमें वे अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं और साथ ही बुराइयों का नाश करती हैं।

वे निशाचर शक्ति की प्रतीक हैं — यानि वह शक्ति जो रात्रि (अँधेरे, भय, बाधाएँ) को हराती है।भक्त मानते हैं कि उनकी पूजा करने से जीवन में सब प्रकार की बाधाएँ, रोग, भय, शोक, संकट आदि दूर होते हैं।

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महत्व एवं कर्म

Navratri 2025 सप्तमी तिथि को मां कालरात्रि की पूजा करने से विशेष बल एवं सुरक्षा प्राप्त होती है।यह दिन उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो जीवन में भय, तनाव या अनिश्चितता से जूझ रहे हों।

माता कालरात्रि की पूजा से भक्त को निडरता, आत्मसुरक्षा और मानसिक स्थिरता मिलती है।कथा और पुराणों में कहा जाता है कि वह नकारात्मक शक्तियों का विनाश करती हैं और भक्तों को शुद्धि प्रदान करती हैं

28 सितंबर 2025 को पूजा विधि

नीचे सामान्य रूप से उस दिन की पूजा विधि दी है — पारंपरिक मान्यता अनुसार:

पूर्व तैयारी

1. स्वच्छता — पूजा स्थल, घर, मंदिर आदि को अच्छी तरह से स्वच्छ करें।

2. साहित्य एकत्र करना — देवी की मूर्ति या फोटो, फूल, दीपक, अगरबत्ती, धूप, अक्षत (चावल), कुमकुम, नैवेद्य (भोग), फल, पंचामृत, लाल रंग के वस्त्र आदि।

3. कलश / जल आदि — पानी, घी, कपूर, फल, पंचामृत आदि तैयार रखें।

4. मंत्र एवं पाठ सामग्री — माँ कालरात्रि के मंत्र, स्तोत्र या दुर्गा सप्तशती का संबंधित अंश।

पूजा क्रम (संकेतात्मक

1. घट स्थापना / दीप प्रज्ज्वलन

पूजा की शुरुआत एक शांत समय में करें। शुभ मुहूर्त मिलने पर कलश स्थापित करें और दीप जलाएँ।

2. नमस्कार एवं आवाहन

देवी का आवाहन करते हुए “ॐ श्री कालरात्र्यै नमः” आदि मंत्रों से देवी को आमंत्रित करें।

3. अर्घ्य एवं अक्षत अर्पण

जल, अक्षत, फूल, गुलाल, नैवेद्य आदि अर्पित करें।

4. धूप, दीप, अगरबत्ती

धूप और दीप प्रज्ज्वलित कर देवी की आरती करें।

5. मंत्र जाप और पाठ

माँ कालरात्रि के मंत्र या स्तोत्र जैसे “ॐ कालरात्र्यै नमः”, या दुर्गा सप्तशती का वो अंश जो सप्तमी से संबंधित हो, उसका जाप करें।

6. प्रसाद वितरण

अर्पित भोग (नैवेद्य) को प्रसाद के रूप में वितरित करें।

7. आरती एवं समापन

अंतिम आरती करें और दिव्यप्रकाश, तिलक आदि देकर पूजा समाप्त करें।

भोग / नैवेद्य

भोग में मीठे व्यंजन जैसे हलवाई मिठाई, लड्डू, खीर आदि हो सकते हैं।ताजे फल, पंचामृत, गुड़, दूध, दही आदि भी शामिल किए जाते हैं।देवी के प्रिय रंगों व वस्तुओं को ध्यान में रखकर भोग चढ़ाया जाता है — विशेषकर लाल या गहरी रंग की चीजें, जो शक्ति एवं ऊर्जा का प्रतीक हैं।

पूजा का आध्यात्मिक संदेश और प्रभाव

माँ कालरात्रि की पूजा हमें सिखाती है कि हमें अपने जीवन से नकारात्मकता, भय, दोष, अवसाद, मंदबुद्धि आदि को हटाना चाहिए।

जैसे अँधेरे में प्रकाश की ज्योति आ जाती है, उसी प्रकार माँ कालरात्रि की उपासना से मानव जीवन में प्रकाश, सुरक्षा, शौर्य और सच्चाई आती है।

इस दिन की पूजा से मन में दृढ़ता, साहस, आत्मबल जागृत होता है।साथ ही, नवरात्रि के इस सातवें दिन की पूजा एक क्रम में आगे की पूजा — जैसे अष्टमी, नवमी आदि — के लिए ऊर्जा प्रदान करती हैं।

रंग, मुहूर्त और विशेष संकेत

2025 के नवरात्रि के रंगों की सूची में, 28 सितंबर को सप्तमी के दिन का रंग “संतरा / ऑरेंज” रखा गया है।भक्त उस दिन इस रंग का वस्त्र पहन सकते हैं, फूल इस रंग के उपयोग कर सकते हैं।पूजा का शुभ मुहूर्त और काल (राहु, गुरु इत्यादि) स्थानीय पंचांग अनुसार देखा जाना चाहिए।यदि संभव हो, तो सायंकाल की पूजा में विशेष ध्यान दें क्योंकि देवी कालरात्रि रात की देवी हैं

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सावधानियाँ और सुझाव

पूजा के समय अशुभ मुहूर्त, राहु काल, नाक्षत्र दोष आदि से बचें।

यदि संभव हो, तो ब्राह्मण या पंडित की उपस्थिति में पूजा करें।

पूजा के दौरान मन अस्वच्छ विचारों से शांत रखें।

भोग में ताजगी और शुद्धता का ध्यान रखें।

पूजा स्थाल पर किसी भी तरह की अशुद्धि न हो — जैसे वायरस, गंदगी आदि से दूरी रखें। आपने आस पास साफ सफाई बनाए रखे

निष्कर्ष

28 सितंबर 2025 को नवरात्रि के सप्तमी तिथि पर माँ कालरात्रि की पूजा होगी। इस दिन देवी को स्थापित करने, मंत्र जाप करने, भोग अर्पित करने तथा उनकी महिमा का स्मरण करने से व्यक्ति जीवन में नकारात्मक शक्तियों से मुक्त हो सकता है। हर रूप की देवी की एक वि

शेषता होती है, और यह सप्तमी हमें यह स्मरण कराती है कि अँधेरे (भय, दुःख, दोष) से भी मुकाबला करना संभव है, यदि हम शक्ति, विश्वास और भक्ति से आगे बढ़ें।

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