अहमदाबाद डिजिटल अरेस्ट स्कैम: 2025 11.42 करोड़

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अहमदाबाद डिजिटल अरेस्ट स्कैम

 अहमदाबाद डिजिटल अरेस्ट स्कैम: 2025 ₹11.42 करोड़ की ठगी का खुलासा | जानिए कैसे बचें साइबर फ्रॉड से

परिचय :

अहमदाबाद डिजिटल अरेस्ट  स्कैम नामक साइबर स्कैम ने मचाई सनसनी। तीन लोगों ने ₹11.42 करोड़ की ठगी की। जानिए पूरी कहानी, स्कैम का तरीका और इससे कैसे बचें। सभी जानकारी नीचे दिए गए हैं जाने क्या है राज क्या हुआ आगे । ठगी का तरीका अहमदाबाद में और डिजिटल अरेस्ट स्कैम 2025 कैसे बचे डिजिटल स्कैम से नीचे दिए गए पैराग्राफ में देखे।

अहमदाबाद डिजिटल अरेस्ट स्कैम

अहमदाबाद में क्या हुआ ठगी की कहानी जिसने हिला दिया शहर: 

अहमदाबाद फ्रॉड न्यूज़ अहमदाबाद पुलिस ने एक ऐसे साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने “डिजिटल अरेस्ट स्कैम” के जरिए देशभर में ₹11.42 करोड़ से अधिक की ठगी की।भारत में UPI बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन लॉन्च 2025
तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो खुद को CBI, RBI या TRAI जैसे सरकारी अधिकारियों के रूप में पेश करते थे।
वे लोगों को व्हाट्सएप या वीडियो कॉल के ज़रिए डराते कि उनका आधार कार्ड या मोबाइल नंबर किसी अपराध में इस्तेमाल हुआ है।

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जब पीड़ित घबरा जाते, तो उन्हें कहा जाता कि “आपकी गिरफ्तारी का वारंट जारी हो गया है।”
इसके बाद उन्हें एक बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता — ताकि “आपका नाम क्लियर हो सके।”
यही पैसे बाद में अन्य फर्जी खातों में ट्रांसफर कर दिए जाते थे।

क्या है “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम:

Digital Arrest Scam” एक नया साइबर फ्रॉड तरीका है, जिसमें ठग सरकारी एजेंसियों की फर्जी पहचान बनाकर लोगों को डराते हैं।
वे कहते हैं कि आपके खिलाफ केस दर्ज है और जांच चल रही है। अगर आप सहयोग नहीं करेंगे, तो आपको “डिजिटल रूप से गिरफ्तार” किया जाएगा।

डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड असल में, “डिजिटल अरेस्ट” जैसा कोई कानूनी शब्द नहीं होता।
यह पूरी तरह एक मनोवैज्ञानिक जाल है, जो डर के जरिए पैसे निकलवाने का तरीका है।

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 ठगी का तरीका (Modus Operandi)

  1. व्हाट्सएप या वीडियो कॉल से संपर्क:
    साइबर ठगी 2025 कॉल किसी विदेशी नंबर से आती है, लेकिन बोलने वाला खुद को भारतीय एजेंसी का अधिकारी बताता है।
  2. डर पैदा करना:
    कहा जाता है कि आपके आधार, बैंक अकाउंट या सिम से अपराध हुआ है।
  3. धमकी और दबाव:
    “आपको अभी गिरफ्तार किया जा सकता है”, “आपकी फाइल कोर्ट में जा चुकी है” जैसी बातें कही जाती हैं।
  4. पैसे मांगना:
    कहा जाता है कि यदि आप “जांच में सहयोग” करना चाहते हैं, तो कुछ राशि एक खाते में ट्रांसफर करें।
  5. फर्जी खातों में लेनदेन:
    पीड़ित के पैसे फर्जी ट्रस्ट, NGO या बिजनेस खातों में भेजे जाते हैं, जिन्हें बाद में खाली कर दिया जाता है।
  6. नेटवर्क से जुड़ाव:
    अहमदाबाद पुलिस की जांच में यह भी पाया गया कि यह गिरोह देशभर के 18 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी नेटवर्क का हिस्सा था।

 क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे साइबर फ्रॉड:

गुजरात पुलिस और NCRB की रिपोर्ट बताती है कि राज्य में साइबर अपराधों में 41% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इसमें सबसे ज़्यादा मामले फिशिंग, ऑनलाइन लोन फ्रॉड, और डिजिटल अरेस्ट जैसे स्कैम के हैं।

अहमदाबाद डिजिटल अरेस्ट स्कैम

कारण:

  • डिजिटल ट्रांजैक्शन का बढ़ता उपयोग
  • जागरूकता की कमी
  • विदेशी नंबरों व फर्जी KYC अकाउंट्स की पहुँच
  • ऑनलाइन भुगतान ऐप्स की आसान उपलब्धता

पीड़ितों की भावनाएँ  डर  शर्म और नुकसान:

डिजिटल अरेस्ट स्कैम के पीड़ित सिर्फ पैसे नहीं खोते, बल्कि विश्वास और आत्मसम्मान भी खो देते हैं।
कई लोग शर्म या डर की वजह से पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराते।

  • आर्थिक नुकसान: लाखों रुपये की हानि
  •  मानसिक तनाव: रातों की नींद उड़ जाती है
  •  कानूनी झंझट: बैंक और पुलिस जांच में महीनों लग जाते हैं

अहमदाबाद पुलिस की कार्रवाई:

गुजरात साइबर क्राइम पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है और कई मोबाइल, लैपटॉप, डेबिट कार्ड, और नकली स्टैम्प बरामद किए हैं।
जांच में यह भी पता चला कि आरोपियों ने ठगी के पैसे विदेशी खातों में भेजे थे।
पुलिस ने 11 अन्य मामलों की फाइलें भी खोली हैं, जिससे बड़े नेटवर्क की आशंका है।

 कैसे बचें डिजिटल अरेस्ट स्कैम से:

1. सरकारी एजेंसियाँ व्हाट्सएप या कॉल से बात नहीं करतीं।
किसी भी कॉल में CBI, पुलिस या RBI का नाम आए तो तुरंत कॉल काट दें।

2. कभी अपनी व्यक्तिगत जानकारी न दें।
OTP, बैंक डिटेल, पासवर्ड, या कार्ड नंबर साझा न करें।

3. हमेशा नंबर गूगल करें।
कई बार वही नंबर पहले से साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज होता है।

4. डर या घबराहट में पैसे न भेजें।
अगर कोई कहे “अभी ट्रांसफर करो नहीं तो गिरफ्तारी होगी” — यह निश्चित रूप से ठगी है।

5. साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत शिकायत करें।
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खुद को कैसे बचाएँ — 8 अहम टिप्स:

1. कभी भी किसी “अधिकारी” पर बिना जांच भरोसा न करें।

2. OTP, बैंक डिटेल या पासवर्ड किसी को न बताएं।

3. डराने वाली कॉल आए तो तुरंत कॉल काटें और 1930 पर रिपोर्ट करें।

4. National Cybercrime Portal पर शिकायत दर्ज करें – www.cybercrime.gov.in

5. सोशल मीडिया पर जानकारी साझा न करें।

6. अपने बैंक खातों की नियमित जांच करें।

7. टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) जरूर लगाएँ।

8. संदिग्ध नंबर को ब्लॉक करें और दूसरों को आगाह करें।

गुजरात में साइबर अपराध के आंकड़े: 

वर्ष साइबर ठगी के मामले कुल राशि (अनुमानित)

2023.       1,532 ₹892 करोड़
2024.      2,100+ ₹1,200 करोड़
2025      अब तक 1,000+ ₹900+ करोड़

ये आंकड़े बताते हैं कि ऑनलाइन फ्रॉड अहमदाबाद कि साइबर अपराध दिन-ब-दिन तेजी से बढ़ रहे हैं। इसलिए आपको जानकारी लेना होगा और सतर्क रहना होगा कोई भी काल या SMS कर सकता है इसलिए सावधान रहिए इन सभी चीजों से ।

निष्कर्ष:

अहमदाबाद में हुआ यह डिजिटल अरेस्ट स्कैम एक चेतावनी है कि आज के डिजिटल युग में धोखेबाज कितने चालाक हो चुके हैं।
वे सरकारी एजेंसियों का नाम लेकर लोगों के भय और अनजानपन का फायदा उठाते हैं।

इसलिए, जागरूक रहें, सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज पर तुरंत रिपोर्ट करें।
आपकी थोड़ी सावधानी आपकी मेहनत की कमाई को बचा सकती है।

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